हज़रते बखतियार काकी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते है हम लोग हज़रते ख्वाजा गरीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलैह कि मजलिस मे बैठे हुवे थे कि दुआ और नमाज़ के बारे मे बात निकली तो आप हजरत ख्वाजा मोऊनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह ने फरमाया कि सुनो मै एक दिन बगदाद के एक सेहरा से गुज़र रहा था तो मुझे एक पहाङ पर एक गार (गुफा) दिखाई दि मे उस गार मे पहुचा तो देखा कि एक बुज़ुर्ग अल्लाह कि ईबादत मे मशगुल है वो नमाज़ पढ रहे थे और इस कदर खुशु और खुज़ु और इस कदर अच्छे अन्दाज़ मे नमाज़ पढ रहे थे कि मे उनकी नमाज़ को देखने लगा बहुत देर तक वो नमाज़ मे खङे हो कर तिलावत करते रहे फिर बङी देर उन्होने रूकु किया फिर बङी देर तक सज्दा किया यानी बहुत अच्छी नमाज़ पढी फिर सलाम फेर कर अपने पास रखा एक काला कपङा उठा कर अपने मुह पर डाल लिया और दुआ करने लग गए और इस कदर रोते हुवे दुआ मे अर्ज़ करते या अल्लाह मे उस तरीके से नमाज़ नही पढ पाया जिस तरह पढने का हक था या अल्लाह तु अपने करम से बस मेरी नमाज़ को कुबुल कर ले, ,,,,,,फिर वो बुज़ुर्ग दुआ से फारीग हो कर मेरी तरफ मुतवज्जेह हुवे और कहाँ ऐ मोईनुद्दीन नमाज़ के बारे मे अल्लाह से डर और नमाज़ को उसके वक्त पर अदा कर और उसको उसके हक पर अदा कर यानी खुशू और खुज़ु के साथ दिल लगा कर नमाज़ पढ सही तरीके से नमाज़ मे तिलावत कर सही तरीके रुकू कर सही तरीके से सज्दा कर और नमाज़ का हक अदा कर जब बन्दा नमाज़ को उसके वक्त पर और सही तरीके से अदा करता है तो ये नमाज़ को फरिश्ते बहुत हि अच्छे कपङे मे लपेट कर आसमान कि ओर ले जाते है यहाँ तक कि उस नमाज़ के लिये आसमान के दरवाज़े खोल दिये जाते है और वो अर्श तक पहुच जाती है और अल्लाह कि बारगाह मे दुआ करती है या अल्लाह इस नमाज़ी को जिसने मुझे सही तोर से अदा करके मुझे आबाद किया तु इस नमाजी को भी आबाद कर दे,,,,,,लेकिन जो बन्दा नमाज़ को सुस्ती से और सही तोर से अदा नही करता तो फरिश्ते उस नमाज़ को बङे हि बोसीदा कपङे मे लपेट के आसमान कि ओर ले जाते है यहाँ तक कि उस नमाज़ के लिये आसमान के दरवाज़े भी नही खोले जाते और अल्लाह कि तरफ से एलान होता है कि इस नमाज़ को उस नमाज़ी के मुह पर मार दो फिर वो नमाज़ उस नमाज़ी के लिये जिसने उसे तोर से और सही वक्त पर अदा ना किया था बद्दुआ करती है कि या अल्लाह इस को बरबाद कर दे जिस तरह इस शख्स ने मुझे बरबाद किया फिर वो बुज़ुर्ग फरमाने लगे ए मोइनुद्दिन इसलिये मे अल्लाह से शरमा के अपने मुह पर कपङा डाल लेता हु कि पता नही मेने नमाज़ का हक अदा किया कि नही और दुआ करता हु कुबुल कर ले ,,,,,,फिर हज़रते बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते है कि हजरत ख्वाजा मोईनुद्दिन रहमतुल्लाह अलैह इतना फरमा कर सर झुका कर रोने लगे तो हम भी रोने लगे फिर आपनॆ सर ऊठाया और फरमाया ऐ लोगो नमाज़ के बारे मे अल्लाह से डरो और नमाज़ को उसके वक्त पर अदा करो और सही तरीके से अदा करो कल कियामत मे सबसे पहले नमाज़ का हिसाब होगा जो इसमे कामियाब हो गया वो निजात पा गया और जो इसमे ना कामियाब हुवा वो हलाक हो गया इसलिये नमाज पढो और अपने रब से खुब मुनाजात (यानी दुआ) करो (फैजाने चिश्त सफा 198)
फलसफा- वो बुजुर्ग जो इतनी अच्छी और सही तोर से नमाज़ अदा कर रहे थे फिर भी अल्लाह से डर कर रो रो के नमाज़ के कुबुल होने कि दुआ करते हे और एक हम है कि टूटी फुटी पढते वो कभी -कभी या जुम्मे को उसके बावजुद हमे अपनी नमाज़ के कुबुल होने कि रो के गिङगिङा के दुआ मागने कि फुर्सत नही और ये सब बाते भी उन लोगो के लिये हमारे बुजुर्ग बता रहे जो नमाज़ को अपने वक्त पर सही तोर से अदा नही करते उन लोगो का (अल्लाह रहम करे) पता नही क्या हाल होगा जिन्हे नमाज़ कायम करने कि फुर्सत नही ,,,,,,
दुआ -या अल्लाह इन सारी बातों पर सबसे पेहले मुझे अमल करनेकी तौफीक अता फरमा
या अल्लाह हमारी नमाज़ कि कोताहियो को माफ कर दे और हमे सच्चा व पक्का नमाज़ी बना दे...!!
आमिन
सुम्मा आमीन
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